बालको चिमनी दुर्घटना – 01 : लाशों के ढेर में जिंदा यक्ष प्रश्न, हादसा या व्यवस्था की चूक..? बख्शी आयोग की जांच ने भी उठाए थे सवाल

कोरबा। 23 सितंबर 2009 कोरबा के औद्योगिक इतिहास का वह भयावह दिन, जिसे समय भी अपने पन्नों से मिटा नहीं पाएगा। बालको के 1200 मेगावाट पावर प्लांट विस्तार परियोजना में निर्माणाधीन विशाल चिमनी देखते ही देखते धराशायी हुई और उसके मलबे में दबकर 40 श्रमिकों की मौत हो गई। घटना के बाद चारों तरफ मलबा व खून से लथपथ लाशें पड़ी हुई थीं। मलबा हटाने और लाशें निकालने रेसक्यू ऑपरेशन दस दिन से ज्यादा चला।

सरकारी अभिलेखों में दर्ज यह संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 40 परिवारों की उजड़ी हुई दुनिया और उन अनगिनत सवालों का प्रतीक है, जिनके जवाब आज भी जनमानस तलाश रहा है। संसद में भी घटना के बाद 40 श्रमिकों की मौत का उल्लेख हुआ था।

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हादसे के बाद न्यायिक जांच के लिए गठित संदीप बख्शी जांच आयोग ने बालको, सेपको और निर्माण से जुड़ी कंपनियों के साथ-साथ तत्कालीन नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा श्रम विभाग के अधिकारियों की भूमिका और कथित लापरवाही पर भी सवाल उठाए थे।

आयोग की रिपोर्ट में निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित नियमों के पालन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की गई थी।

लेकिन आज, लगभग 17 वर्ष बाद, जब इस बहुचर्चित प्रकरण में अभियोजन साक्ष्य की प्रक्रिया आगे बढ़ने जा रही है, तब कुछ सवाल फिर से दस्तक दे रहे हैं।

ये सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि यह जानने के लिए हैं कि 40 मौतों के पीछे जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला आखिर कहां तक जाती थी?

दुर्घटना की जांच कर रहे बख्शी आयोग ने इस के लिए बालको और ठेका कंपनियों के साथ ही उन्होंने स्थानीय निकाय और श्रम विभाग के अधिकारियों की लापरवाही की बात भी कही थी।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि परियोजना में चिमनी निर्माण से पहले उसकी स्ट्रक्चर, क्वॉलिटी और सिक्युरिटी से संबंधित बनाए गए कानूनों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि परियोजना में चिमनी निर्माण से पहले उसकी स्ट्रक्चर, क्वॉलिटी और सिक्युरिटी से संबंधित बनाए गए कानूनों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया।

निर्माण के दौरान श्रमिकों और अन्य व्यक्तियों की सिक्युरिटी ऐंड सेफ्टी की पूरी व्यवस्था नहीं करने के लिए बालको ठेका कंपनी सेपको, जीडीसीएल को दोषी बताते हुए नगरपालिका, ग्राम निवेश विभाग और श्रम विभाग के तत्कालीन संबंधित अधिकारियों की उदासीनता को भी दुर्घटना का कारण माना गया था।

यक्ष प्रश्न जो जनमानस को उद्धेलित करते हुए आज भी गूंज रहे हैं..?

★ चिमनी के निर्माण के लिए सभी वैधानिक आवश्यकताओं का अनुपालन न करने के लिए किस – किस की जिम्मेदारी थी?

★ क्या चिमनी निर्माण के पूर्व भूमि का डायवर्सन कराया गया था ?

★ चिमनी निर्माण के पूर्व भूमि का डायवर्सन अगर नहीं कराया गया था, तो जिम्मेदारी किसकी थी ?

★ सुरक्षा उपायों को निर्धारित करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से और किस-किस की थी?

★ क्या बालको की भूमि के विषय में न्यायालय में चल रहे प्रकरण के दौरान नगर पालिक निगम प्रशासन को चिमनी निर्माण के लिए अनुमति जारी करने की अधिकारिता है?

★ निर्माण की अनुमति प्राप्त करने के लिए नगर पालिक निगम कोरबा में पत्र किसके द्वारा प्रस्तुत किया गया था?

★ निर्माण की अनुमति प्राप्त करने के लिए अगर नगर पालिक निगम कोरबा में कोई पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था तो इसका जिम्मेदार अधिकारी कौन था ?

संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश के द्वारा वर्ष 2003 से लगातार 2014 तक लगातार लगभग 2 दर्जन नोटिस बालको को जारी किया गया और यह कार्यवाही मात्र नोटिस जारी करने के साथ कड़ी कार्यवाही समय रहते की जाती तो हो सकता था कि 40 श्रमवीरों की असमय मौत के साथ ही अनेक परिवार अनाथ नहीं होते !

 

सूत्रों की माने तो दुर्घटना के बाद निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कर रहे नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मटेरियल्स एनसीसीबीएम वल्लभगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. एम.एन. अंसारी, समूह प्रबंधक यू.के. मंडल व महाप्रबंधक आर.के. गोस्वामी पर भी साक्ष्य छुपाने और उनसे छेड़छाड़ करने के आरोप तय किए गए हैं। सूत्रों की माने तो इनमें से एक श्री गोस्वामी की मृत्यु हो चुकी है।

राज्यसभा की स्टैंडिंग कमेटी ने मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर को बालको चिमनी दुर्घटना के संबंध में तत्कालीन समय में प्रत्येक घटनाक्रम को लेकर बिंदुवार जानकारी मांगी थी लेकिन क्या हुआ, यह किसी को पता नहीं। पब्लिक डोमेन में भी यह बात सामने नहीं आ पाई है कि मिनिस्ट्री ऑफ पॉवर ने स्टैंडिंग कमेटी को जानकारी उपलब्ध कराई थी या नहीं !

सूत्रों के अनुसार बक्शी आयोग की रिपोर्ट में एक अन्य बात भी सामने आई थी कि चिमनी ढहने के समय पूरे छत्तीसगढ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बिजली गिरने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

ध्वस्त चिमनी का बाल्को स्थल लगभग 22.24N और 82.45 E पर स्थित है जिसके लिए बिजली गिरने का कोई डेटा नहीं है।  बाल्को के अपने ही क्षेत्र में छोटे-बड़े आकार की लगभग एक दर्जन चिमनी हैं और इनमें से किसी पर भी बिजली गिरने या बिजली आधारित दुर्घटना का अनुभव नहीं हुआ।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार बालको की ध्वस्त चिमनी-I को छोड़कर अन्य सभी चिमनी का निर्माण राफ्ट पर किया गया था न कि पाइल फाउंडेशन पर।

एनआईटी विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट के अनुसार, चिमनी-I के ढहने की बड़ी गलती, कई कारणों में से, मुख्य रूप से पाइल कैप्स में दोष था।

तेज हवा या बवंडर को भी दुर्घटना के कारको में एक अन्य रिपोर्ट में माना गया था लेकिन ऐसा होता तो वहां पर अन्य स्थानों पर भी कुछ दुर्घटनाएं घटती।

-चित्र इंटरनेट से साभार

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