कौशल सिखौला : बार-बार चूकते राहुल गांधी, क्या विपक्ष का नेतृत्व संकट में है?

बार बार चूकने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी फिर चूक गए । ताजा चूक बड़ी है , सच कहें तो बहुत बड़ी । सच बात तो यह है कि जब लोहा गर्म था तब किसी को भी बताए बगैर विदेश में थे । मतलब बुरी तरह चूक गए । जब लौटकर आए तो काकरोच और सोनम वांगचुक अपना दरबार सजा बैठे थे । विपक्षी दल वहां जा रहे थे थे , कांग्रेसी नहीं गए । पार्टी बाट जोह रही थी कि साहब आएं तो संसद सत्र की तैयारी करें ।

साहब आते ही उलझ गए पर जंतर मंतर जाकर छात्रों को लीड करने से चूक गए । अपनी नाकामियों की खीज में साहब कभी लोकपथ गए कभी राजघाट पहुंच गए । जब लगा कि कुछ हासिल नहीं हुआ तो प्यारी बहना को साथ लेकर जा पहुंचे पीएम हाउस ? 12 साल से तड़फ रहे थे पर यहां भी चूक गए । शायद पीएम हाउस में घुसना चाहते हों ? पर थोड़ी ही देर में उठाकर थाने ले जाए गए और फिर छोड़ दिये गए ।

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सच्ची बात कहें तो राहुल गांधी ने संसद में बहुत बड़ा मौका गंवा दिया । काकरोच का नाम वे लेना नहीं चाहते । देश भर का युवा उन्हें संसद में सुनना चाहता था । परसों तेजस्वी सूर्या और अनुराग ठाकुर ने राहुल को जिस बुरी तरह धोया था , उसका जवाब देने की बजाय वे बेसिरपैर की लंबी कहानी सुनाते रहे । वे छात्रों पर बोलने से चूक गए , अमित शाह पर बगैर किसी प्रमाण बरसते रहे । नतीजा यह निकला कि सदन ने राहुल की बड़ी बेकद्री की और तमाम बिल पास करा डाले । पेपर लीक रोकने का बिल भी राहुल गाँधी की मूर्खता से आसानी से पास हो गया । उनके द्वारा कहे गए इडीयट और अंधभक्त शब्द किसके लिए थे किसी को समझ नहीं आया ।

अब देखिए ! धर्मेन्द्र प्रधान को हटाने का श्रेय काकरोच ले उड़े । जिन्हें जेल भेजा गया उनकी बात काकरोच पार्टी और सुप्रीमकोर्ट के बीच चली गई । सोनम वांगचुक और काकरोच प्रतिनिधि सीधे जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से बात कर रहे हैं । बिल सदन में पारित हो गया आज राज्यसभा में आ जाएगा जहां बिना किसी शोर कल वन्देमातरम बिल पास हो गया । जब कहानी सीधे सीधे सरकार , काकरोच पार्टी और जेन जी के बीच सिमट गई है तो राहुल गाँधी का रोल ही कहां रह गया ?

कांग्रेस और बाकी विपक्ष को संसद में बोलने का अधिकार है । दर्जनों सांसद बोले भी । कमाल है भाई ज्यादा हाथ पैर फेंकने और ज्यादा अर्बन बनने के चक्कर में राहुल बोलने का मौका गंवा बैठे । बड़ी किरकिरी हुई एलओपी साहब की ? पर उन्हें उनके इर्दगिर्द घेरे बैठे चापलूस उन्हें मानने कहां देते हैं ? अभी तक अंबानी अडानी पर बरसते थे , प्रधानमंत्री पद की गरिमा भुलाकर मोदी से तू तड़ाक की भाषा में बोलते थे , अब शाह के लिए भी वही भाषा ?

राहुल साहब , 12 वर्षों में बहुत कुछ बदल जाता है आप भी बदलो । अपने अहंकार का शमन करो । चाहे जेन जी की भाषा में “कुचु पुचु ” बोलो “फोफो” बोलो पर अब जहर ना घोलो । फेल हो गए हो । जमाना बिल्कुल नया है , अब तो बदल जाओ ?

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