कोरबा में CSEB के गोढ़ी ऐश डाइक का हिस्सा टूटा, निर्माण एवं रखरखाव व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न

कोरबा। जिले के गोढ़ी क्षेत्र में स्थित CSEB के ऐश डाइक (राखड़ बांध) का एक हिस्सा अचानक क्षतिग्रस्त होकर टूट जाने से क्षेत्र में अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना के बाद डाइक के निर्माण, रखरखाव तथा सुरक्षा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बड़ी मात्रा में राखड़ युक्त पानी के आसपास के क्षेत्रों में फैलने से पर्यावरणीय एवं जनसुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ गई हैं।


स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ऐश डाइक की कमजोर स्थिति को लेकर लंबे समय से संबंधित विभाग और अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा था। इसके बावजूद समय रहते आवश्यक मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया गया होता तो इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था।
घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में नाराजगी और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही बरती गई तथा डाइक की नियमित निगरानी और तकनीकी जांच को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है, बल्कि आसपास के किसानों और निवासियों के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार ऐश डाइक के निर्माण, विस्तार और रखरखाव कार्यों की गुणवत्ता को लेकर पूर्व में भी प्रश्न उठते रहे हैं। ऐसे में इस दुर्घटना ने उन आशंकाओं को और बल प्रदान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक अपशिष्ट भंडारण संरचना की नियमित तकनीकी जांच और समय-समय पर सुदृढ़ीकरण अत्यंत आवश्यक होता है। इसमें किसी भी प्रकार की चूक गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है।
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यह घटना केवल एक संरचनात्मक विफलता नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा प्रबंधन की प्रभावशीलता की भी परीक्षा है। यदि स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों और चेतावनियों की अनदेखी की गई है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बनता है। साथ ही, ऐश डाइक जैसे संवेदनशील ढांचों के रखरखाव में पारदर्शिता और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर भी पुनर्विचार की आवश्यकता है।
हादसे के बाद अब प्रमुख मांग यह है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि डाइक टूटने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
फिलहाल विद्युत कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्र के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

Veerchhattisgarh

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