एक भाषण शिक्षक दिवस पर – जयराम शुक्ल
तीज त्योहारों की तरह हर साल शिक्षक दिवस भी आता है। पूजाआराधना में जैसे गोबर की पिंडी को गणेश मानकर
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Read moreढाई -ढाई साल के मुख्यमंत्री के फार्मूले ने बचपन के दिनों की याद दिला दी, जब मां दो बच्चो को
Read moreआज की उथली राजनीति और हल्के नेताओं के आचरण के बरक्स देखें तो अटलबिहारी बाजपेयी के व्यक्तित्व की थाह का
Read moreपण्डित दीनदयाल उपाध्याय स्वतंत्र भारत के तेजस्वी, तपस्वी व यशस्वी चिन्तकों में से एक हैं। उनके चिन्तन के मूल में
Read moreप्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने भारतीय राजनीति की परिभाषा राम मंदिर भूमि पूजन के साथ ही पूरी तरह से बदलकर
Read moreएक बड़ा वर्ग इस सारे घटनाक्रम को लेकर भीतर से आन्दोलित है कि कहां रोजगार, कृषि, शिक्षा को लेकर बात
Read moreजिले के किसानो के लिये यह बेहद पीड़ाजनक-त्रासदायी हो जाता है जब स्वयं प्रदेश के मुखिया यहां बोटिंग करने आतें
Read moreविगत 40 वर्षों से पत्रकारिता जगत में जनसत्ता, फाइनेंशियल एक्सप्रेस सहित कई पत्र-पत्रिकाओं लंबे समय से जुड़े रहे जनहित के
Read moreप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को स्वीकार कर संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2015 में 21 जून को योग दिवस
Read moreपिछले कुछ दिनों से विश्वविजयी गामा पहलवान के बारे में बहुत कुछ लिखा जा रहा है। वेबसाईटस् खोलिए तो गामा
Read moreहिन्दी पत्रकारिता के नवजागरण की अनुगूंज रीवा तक पहुंची तब यहाँ महाराज व्येंकटरमण का शासनकाल था। विश्व की पत्रकारिता का
Read more1957 तक विन्ध्यप्रदेश की राजनीति ने विश्व का ध्यान अपनी ओर खीचें रखा था। वजह नेहरू के कट्टर प्रतिद्वंद्वी डा.
Read moreकरोना के लाकडाउन ने जिंदगी को नया अनुभव दिया है, अच्छा भी बुरा भी। जो जहां जिस वृत्ति या कार्यक्षेत्र
Read moreये नक्सली नहीं चीन के ‘धन’ और ‘गन’ से लैस माओवादी हत्यारे, डकैत और लुटेरे हैं, जिन्होंने देश के भीतर
Read moreनेता कुम्हार के घड़े की तरह ठोक-पीटकर गढ़े जाते हैं या फिर नेतृत्व का गुण लिए हुए पैदा होते हैं,
Read moreराजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर
Read moreबंगाल समेत चार राज्यों में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव मेरे लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहे
Read moreजिन्होंने अंग्रेज शासकों, मुस्लिम लीग के नेताओं के साथ समझौते की मेज पर देश को अंग-भंग करने के निर्णय को
Read moreआज के दौर में जब सरकारों पर उद्योगपतियों के पालने में झूलने के आरोप लगते हैं, मंत्रियों की क्या कहिये
Read moreमेरी दादी अक्सर कहा करती थी- “जेखा जेतनिन गारी मिलति है ओखर उतनै उमिर बढ़ति है तूँ ओखर जवाब भर
Read moreकिसान गुस्साए क्यों हैं..? अव्वल तो यह कि यह आंदोलन पंजाब-हरियाणा का है। इसमें वास्तविक किसानों का सरोकार कितना है
Read moreहम अतीतजीवी हैं। वर्तमान के हर बदलाव को विद्रूप बताते हुए उस पर नाहक ही लट्ठ लेकर पिल पड़ते हैं।
Read moreदुनिया की कोई समस्या जान से बड़ी नहीं होती… कोरबा के जिला चिकित्सालय में वर्ष 2014 से बतौर मेडिकल ऑफिसर
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