निरा’आधार’ जिन्दगी का ग्रोथरेट -साँच कहै ता../ जयराम शुक्ल
आज से कोई बारह-चौदह साल पहले जब यूपीए सरकार ने यूनिक आईडी की अवधारणा दी थी तब स्तंभकार व मैनेजमेंट
Read moreआज से कोई बारह-चौदह साल पहले जब यूपीए सरकार ने यूनिक आईडी की अवधारणा दी थी तब स्तंभकार व मैनेजमेंट
Read moreधार के पत्रकार मित्रों ने जब यह शुभ सूचना दी कि बदनावर में राजेन्द्र माथुरजी की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा सुनिश्चित
Read moreबहुत से अतिवादी हिन्दू अक्सर मुझसे पूछते थे कि भारत इस्राइल का साथ न देकर मुस्लिम देश जैसे UAE, सऊदी,
Read moreपितरपख जाने को है कौव्वे कहीं हेरे नहीं मिल रहे। इन पंद्रह दिनों में हमारे पितर कौव्वे बनके आते थे।
Read more“कभी संयुक्त परिवार समाज के आधार थे जहां बेसहारा को भी जीते जी अहसास नहीं हो पाता था कि उसके
Read moreमुगलसराय जंक्शन अब पं.दीनदयाल उपाध्याय के नाम से जाना जाता है। कुछ वर्ष पहले जब नाम बदलने की बात उठी
Read moreविपत्ति में हमारी आस्था और विश्वास और भी प्रबल हो जाता है। कोरोना का यह भयकाल भी इसके आड़े नहीं
Read moreतीज त्योहारों की तरह हर साल शिक्षक दिवस भी आता है। पूजाआराधना में जैसे गोबर की पिंडी को गणेश मानकर
Read moreढाई -ढाई साल के मुख्यमंत्री के फार्मूले ने बचपन के दिनों की याद दिला दी, जब मां दो बच्चो को
Read moreआज की उथली राजनीति और हल्के नेताओं के आचरण के बरक्स देखें तो अटलबिहारी बाजपेयी के व्यक्तित्व की थाह का
Read moreपण्डित दीनदयाल उपाध्याय स्वतंत्र भारत के तेजस्वी, तपस्वी व यशस्वी चिन्तकों में से एक हैं। उनके चिन्तन के मूल में
Read moreप्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने भारतीय राजनीति की परिभाषा राम मंदिर भूमि पूजन के साथ ही पूरी तरह से बदलकर
Read moreएक बड़ा वर्ग इस सारे घटनाक्रम को लेकर भीतर से आन्दोलित है कि कहां रोजगार, कृषि, शिक्षा को लेकर बात
Read moreजिले के किसानो के लिये यह बेहद पीड़ाजनक-त्रासदायी हो जाता है जब स्वयं प्रदेश के मुखिया यहां बोटिंग करने आतें
Read moreविगत 40 वर्षों से पत्रकारिता जगत में जनसत्ता, फाइनेंशियल एक्सप्रेस सहित कई पत्र-पत्रिकाओं लंबे समय से जुड़े रहे जनहित के
Read moreप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को स्वीकार कर संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2015 में 21 जून को योग दिवस
Read moreपिछले कुछ दिनों से विश्वविजयी गामा पहलवान के बारे में बहुत कुछ लिखा जा रहा है। वेबसाईटस् खोलिए तो गामा
Read moreहिन्दी पत्रकारिता के नवजागरण की अनुगूंज रीवा तक पहुंची तब यहाँ महाराज व्येंकटरमण का शासनकाल था। विश्व की पत्रकारिता का
Read more1957 तक विन्ध्यप्रदेश की राजनीति ने विश्व का ध्यान अपनी ओर खीचें रखा था। वजह नेहरू के कट्टर प्रतिद्वंद्वी डा.
Read moreकरोना के लाकडाउन ने जिंदगी को नया अनुभव दिया है, अच्छा भी बुरा भी। जो जहां जिस वृत्ति या कार्यक्षेत्र
Read moreये नक्सली नहीं चीन के ‘धन’ और ‘गन’ से लैस माओवादी हत्यारे, डकैत और लुटेरे हैं, जिन्होंने देश के भीतर
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