डॉ.पवन विजय : पुस्तकें पढ़िए, ग्रंथ पढ़िए, गीता पढ़िए किसी फर्जी मोटीवेटर की आवश्यकता नहीं पड़ेगी
मोटिवेशन तीन चीजों से आता है। संबंध, समझ और संसाधन। ये तीनों चीजें एक साथ चाहिए होती हैं, ऐसा नहीं कि इसमें से कोई एक मिल जाए तो व्यक्ति मोटिवेट हो जाता है। हो सकता है कि कोई बाजारू गुरु, मोटीवेटर आपके समझ के स्तर पर थोड़ा बहुत काम कर दे पर वह आपका धन और संबंध चूस लेता है। आपको वह अपने वीडियो, सेमिनार से आगे नहीं जाने देता। उसके लिए आप उसकी फॉलोअर रूपी दौलत हो जिसे वह हमेशा अपने जेब में लिए घूमेगा ताकि वह अपनी परचेसिंग कैपेसिटी बढ़ा सके। आप उस पर निर्भर हो जाएं, उसकी यही कोशिश रहती है।
बाजारू मोटीवेटर खुद में बहुत डिप्रेस्ड रहते हैं, उनकी जुगत होती है कि किस तरह झूठ बोलकर लोगों को उकसाते रहें, बीती घटनाओं को अपनी स्पीच में फिट कर मदारी का खेला दिखाते दिखाते एक दिन स्वयं ये बंदर हो जाते हैं। खोखले लोग जो जीवन में कुछ नही कर पाए मोटीवेटर का मास्क लगा कर पैसा कमाने की कोशिश करते हैं।
जो जाग्रत होता है उसका स्पर्श, उसकी दृष्टि आपकी बाती को प्रकाशित कर देती है।
आपका भाई, मित्र, पत्नी/पति, गुरु या जो भी आपके संबंध में है, आपको संसाधन मुहैया करा सकता है, आपको समझता है और उसके आधार पर समझा सकता है वही आपको मोटिवेट कर सकता है। एक बात याद रहे ध्रुव, प्रहलाद, नचिकेता, अपाला, हरिश्चंद, श्रवण कुमार, राम, कृष्ण, शंकराचार्य, राणा, शिवा, पन्ना धाय से लेकर एक लंबी लिस्ट है हमारे महापुरुषों की, उनसे जो प्रेरित ना हुआ उसे कोई और क्या ही मोटिवेट कर सकता है। बाकी मार्केट और विज्ञापनों के जाल आपको फांसने के उपकरण से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
पुस्तकें पढ़िए, ग्रंथ पढ़िए, गीता पढ़िए किसी फर्जी मोटीवेटर की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
इसके अतिरिक्त एक रामबाण तरीका और है, सेवा करने से आपका अहंकार, पीड़ा, अवसाद और निराशा कम होती है।
