अमित सिंघल : आखिरकार महिलाएं मेकअप क्यों करती है..?

आखिरकार महिलाएं मेकअप क्यों करती है?
इसके लिए सहस्त्रो वर्षो पूर्व जाना होगा जब हमारे पूर्वज घुमंतू वाला जीवन व्यतीत करते थे। पुरुष भोजन के लिये जाते थे, शिकार करते थे, जंगली जानवरो एवं आक्रमणों से अपने समाज की सुरक्षा करते थे।

महिलाएं समाज को संभालती थी, बच्चो की देखभाल करती थी, भोजन-पानी, मरहम-पट्टी की व्यवस्था करती थी।

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उस समाज में प्रणय लीला बलशाली पुरुषो एवं “आकर्षक” स्त्रियों के मध्य होती थी। युगल बनवाने के लिए लिए परिवार के बुजुर्ग या वैवाहिक विज्ञापन नहीं होते थे।

अतः, तब स्त्रियों ने अपनी ओर पुरुषो का ध्यान खीचने के लिए कानो पर चमकते झुमके, माथे पर बिंदी, आँखों में काजल, नाक में चमकती पिन, होठो एवं गालो पर लाली, गले में हार पहनना शुरू किया।

परिणाम यह हुआ कि दूर से वापस लौटते युवा का ध्यान स्त्री के चेहरे पर फिक्स हो जाता था।

कान के चमकते झुमके, नाक पर पिन एवं गले का हार चेहरे को फ्रेम करते थे, माथे की बिंदी, आँख का काजल, होंठ की लाली, हाथ एवं पैर की उंगलियों पर लाली किसी पुरुष की दृष्टि को चेहरे एवं शरीर की ओर फोकस करवाते थे।

अगर स्त्री दृष्टिक्षेत्र में ना हो, तो हाथ की चूड़िया-कंगन, पैर के पायल की मधुर झंकार पुरुष का ध्यान आकर्षित करती थी।

कुल मिलाकर, इस मेकअप एवं आभूषणों का सामूहिक प्रभाव यह हुआ कि पुरुष, चाहे कितना भी बलवान हो, उदासीन हो, स्त्रियोचित आकर्षण में बंध जाता था।

तथाकथित बलवान पुरुष तथाकथित दुर्बल स्त्री के मोहपाश में अपने आप को असहाय पाता था।

और यह प्रथा आज भी प्रचलित है।

यह सहज प्रवृत्ति पुरुष एवं स्त्री की अनुवांशिकी में प्रवेश कर गयी है, अंकित है।

तभी चाहे स्त्री सैनिक हो, पुलिस कर्मी हो, किसी कारपोरेशन की अध्यक्ष हो, उच्च सरकारी कर्मी हो या फिर ट्रक ड्राइवर, जब भी अवसर मिलेगा तब श्रृंगार करेगी। पर्स में एक लिपस्टिक एवं कुछ अन्य कास्मेटिक अवश्य रहेंगे।

पुरुष प्रसाधन कक्ष में आधा शीशा रहेगा, लेकिन स्त्री प्रसाधन कक्ष में फुल लेंथ मिरर मिलेगा।

लेख का सार यह है कि स्त्रियों के मेकअप को स्वीकार कीजिये। इसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया, प्रकृति की देन मानिये।

क्योंकि इसी लाल होंठो पर, कजरारी आँखों पर, चमकते झुमके पर, इसी मधुर झंकार पर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य टिका है।

अगर विश्वास ना हो, तो यूरोप की तेजी से गिरती शिशु जन्म दर को देख सकते है, जहाँ आम स्त्रियों ने मेकअप अत्यधिक कम कर दिया है।

अतः हे पुरुष! खिसियाना बंद कीजिए; प्रेयसी एवं घरवाली को अधिक से अधिक मेकअप का सामान एवं आभूषण खरीदवाने में सहयोग करे।

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