डॉ. भूपेंद्र सिंग : ये बिकाऊ विद्वान अमेरिका के इशारे पर भारत में वोट चोरी फ्राड के बाद अराजकता फैलाने कर रहे नए मुद्दों की खोज..!
बिहार चुनाव के बाद भी विपक्षी दलों के द्वारा द्वारा देश में हिंसा फैलाकर असंवैधानिक तरीके से भारत में सत्ता बदलने के प्रयास का अभियान जारी रहेगा। यदि रूस और यूक्रेन युद्ध नहीं रुकता तो अमेरिका भारत को अपने नियंत्रण में लेने के लिए फंडिंग बढ़ाकर और नए-नए फर्जी मुद्दे उठवा सकता है, जो देश में अस्थिरता का भय फैलाएं। CSDS केवल एक उदाहरण है; ऐसे तमाम बिकाऊ विद्वान अमेरिका के इशारे पर अलग-अलग रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं, जो भारत में जातीय, क्षेत्रीय, और भाषाई दरार पैदा कर सकते हैं।
फिलहाल सत्ता के लिए छटपटाते विपक्षी दल देश को फूंकने की कीमत पर भी सत्ता में आने को छटपटा रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती दूरी का फायदा ये उसी तरह उठाने की कोशिश करेंगे, जैसे गलवान घाटी मामले के समय ये चीन से उठाने की कोशिश कर रहे थे। लोगों को इस विपक्षी दलों से सावधान रहने की जरूरत है। अगले चार साल के बाद एक अधेड़ से बुजुर्ग की श्रेणी में पहुँचने वाले हैं; ऐसे में उन्हें लगता है कि शायद आगे चलकर इतनी दौड़-भागने की शक्ति न बचे, इसलिए जो करना है, उसे अभी जल्द से जल्द करना है। देश के नागरिकों को विपक्षी दलों से सावधान होने की आवश्यकता है।
वोट चोरी नामक फ्रॉड मुद्दे में एक के बाद एक रोज़ झूठ पकड़ा जा रहा है, लेकिन प्रत्येक झूठ के बाद अगला झूठ बिना किसी लाज-शर्म के शुरू हो जाता है और पुराना झूठ सोशल मीडिया से चुपचाप डिलीट कर दिया जाता है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को भी बड़े पैमाने पर ऐसे फ्रॉड मुद्दे पर वीडियो बनाने और उन्हें फैलाने के लिए अच्छे-खासे पैसे मिले थे; हालांकि बाद में कड़ाई होने पर कई ने वीडियो डिलीट कर दिए।
लेकिन वोट चोरी एक फ्रॉड मुद्दा है, जिसके आधार पर देश में हिंसा के माध्यम से सत्ता परिवर्तन का सपना देखा जा रहा है। इसका ज़मीन पर प्रभाव शून्य है। इसके बाद इसी तरह का जाति अथवा भाषा आधारित कोई मुद्दा भी उठाया जा सकता है। भारत के रक्षा से जुड़े प्रतिष्ठानों पर भी अगले दो-तीन महीने में विपक्षी दलों के द्वारा द्वारा सुनियोजित अटैक हो सकता है। इसी तरह कुछ बड़े उद्योग घरानों पर भी फिजिकल अटैक की योजना को विपक्षी दल अंजाम देने का प्रयास करें तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
कुल मिलाकर बिहार चुनाव के बाद भी विपक्षी दलों के द्वारा द्वारा देश में हिंसा फैलाकर सत्ता पाने का प्रयास बंद नहीं होगा। किसान आंदोलन और CAA आंदोलन की तरह वोट चोरी आंदोलन चलाया गया है, लेकिन इसमें सड़क पर भीड़ जुटाने और हिंसा के लिए प्रेरित करने में दिक्कत यह हो रही है कि यहाँ पर जाति अथवा धर्म नामक कोई ऐसा विषय नहीं है, जिसके कारण कांग्रेस के अलावा कोई और तंत्र लोगों को सड़क पर प्रायोजित रूप से उतार सके। बिहार में के नेताओं अच्छा इस्तेमाल अवश्य किया है, लेकिन बाकी जगह कोई इतना मूर्ख बन पाए, ऐसा कोई तो दिखाई नहीं पड़ रहा। फिर भी, पैसा मिलता रहेगा तो मुद्दा भी उछाला जाता रहेगा—ज़मीन पर न सही, टीवी और सोशल मीडिया पर ही सही।
