NRI अमित सिंघल : मोदी इनका रचनात्मक विनाश कर रहे.. 3 समाचारों का अद्भुत विश्लेषण…

आज तीन समाचार पढ़ने को मिले। यद्यपि सभी घटनाएं अलग है, इनको एक सूत्र में पिरोने का प्रयास करता हूँ।

प्रथम, तेलंगाना की पुलिस ने रोहित वेमुला की आत्महत्या के केस को बंद कर दिया है। पुलिस के अनुसार, वेमुला वास्तव में दलित नहीं था और उसने आत्महत्या इसलिए की क्योंकि उसे अपनी पोल खुलने का डर था। ध्यान दीजिये, तेलंगाना में कांग्रेस या BRS की सरकार का शासन रहा है।

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द्वितीय, दिल्ली पुलिस ने न्यूजक्लिक वेबसाइट के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ के विरुद्ध चार्जशीट में बताया कि पुरकायस्थ एवं उनकी टीम को आतंकियों, नक्सलियों और दिल्ली में हिंदू-विरोधी दंगों के आरोपितों को फंडिंग देना, अपने कर्मचारियों का उपयोग पैसे पहुँचाने में करना, तथाकथित किसान आंदोलन की फंडिंग, चीनी मोबाइल कंपनियों को डिफेंड करना, कोरोना से निपटने के लिए भारत के प्रयासों के बारे में दुष्प्रचार करना, भारतीय वैक्सीन के खिलाफ लोगों में गलत जानकारी फैलाना, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं बताना जैसे दुष्प्रचारों के लिए चीन एवं अन्य विदेशी स्रोतों से 115 करोड़ धन एवं निर्देश मिला था।

भयावह यह है कि विदेशी आकाओ ने ईमेल पर पुरकायस्थ को निर्देश दिया कि उसे मोदी सरकार के विरुद्ध आंदोलन को तेज करने के लिए जेंडर (महिला कार्ड) और आइडेंटिटी के मुद्दे का कार्ड खेलना चाहिए। ईमेल में आगे लिखा गया था कि ऐसे आंदोलनों के लिए पुरकायस्थ एवं उसकी टीम को हिज़्बुल्लाह और मुस्लिम ब्रदरहुड से सबक लेना चाहिए जो डॉक्टरों एवं चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वालो को एक टूल के रूप में प्रयोग करते है।

यह दिशानिर्देश अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भेजे गए थे।

तृतीय, हिन्दू बिजनेसलाइन समाचारपत्र बतलाता है कि तमिलनाडु के तिरुपुर जिले का कपड़ा उद्योग श्रमिकों की कमी से त्रस्त है। यहाँ के कपड़ा उद्योग की लगभग 2000 फैक्ट्री ने पिछले वर्ष 58000 करोड़ रुपये का व्यापार किया था। लेकिन इस समय श्रमिकों की 30 प्रतिशत शॉर्टेज है – अर्थात सौ श्रमिकों की आवश्यकता है, लेकिन केवल 70 श्रमिक ही मिल रहे है।

समाचारपत्र लिखता है कि उत्तर भारत के मजदूर, जो दिवाली के दौरान घर चले गए थे, पूरी संख्या में वापस नहीं आए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लेबर की कमी हो गई है। उनके वापस ना लौटने का कारण यूपी, बिहार और ओडिशा में रोजगार के अवसरों की उपलब्धता को बताया गया है।

प्रथम दो समाचार बतलाते है कि मोदी सरकार के द्वितीय कार्यकाल में अभिजात वर्ग अपने विशेषाधिकारों और अस्तित्व को बचाये रखने के लिए झूठ, छल, कपट और हिंसा का सहारा ले रहा था।

कारण यह है कि अराजकता एवं अशांति के समय पूँजी निवेश, उद्यम एवं व्यापार में रिस्क अत्यधिक बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप पूँजी का “दाम” बढ़ जाता है; इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ जाती है; लोन मिलना दुरूह हो जाएगा; रातो-रात मंहगाई बढ़ जाती है; लोग उद्यम नहीं लगाना चाहेंगे। जान-माल की अपूर्णनीय हानि होगी; यात्रा असुरक्षित हो जाती है। महिलाओ के अधिकारों का पाश्विक हनन होगा; सरकार अस्थिर हो जाती है; देश की सीमाओं पे असुरक्षा बढ़ जायेगी।

यही राष्ट्र विरोधी शक्तियां चाहती थी और है। क्योकि अराजकता एवं अशांति में केवल अभिजात वर्ग ही फलता-फूलता है।

अतः, प्रतिउत्तर में प्रधानमंत्री मोदी अपनी नीतियां और कार्यो से अभिजात वर्ग का रचनात्मक विनाश (creative destruction) कर रहे थे (थे पर जोर है क्योकि यह वर्ग लगभग विलुप्त होने के कगार पर है)। मोदी सरकार बंगाल की हिंसा, फर्जी किसान आंदोलन, दिल्ली के दंगाइयों इत्यादि से कानून के दायरे में ही निपट रहे है।

तीसरा समाचार बतलाता है कि राष्ट्र विरोधी शक्तियों का गेम ना खेलकर (अर्थात, हिंसक-फर्जी आंदोलनों को हिंसा के द्वारा नहीं दबाना), पिछड़े प्रांतो का तीव्र विकास करके प्रधानमंत्री मोदी उन लोगो को समुचित उत्तर दे रहे है।

अंत में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, SC-ST आयोग, महिला आयोग एवं बाल आयोग, सीबीआई, नारकोटिक्स (नशीली दवा) कंट्रोल ब्यूरो, NIA, आधार-डाटा माइनिंग, अज्ञात व्यक्तियों द्वारा मोदी सरकार अपना कार्य कर रही है। ऐसी कार्यवाई का परिणाम आने में समय लगता है, लेकिन अराजक शक्तियों को बुरी तरह परास्त कर देता है।

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