ध्यान में इूबकर देखने की जंरूरत औघड़ श्री रामजी बाबाजी को नहीं पड़ती…खाली आंखों से शून्य में भी सब देख लेते हैं। समाधि के लिए कोई स्थल तय नहीं चलते-चलते जहाँ खड़े हुए वहीं समाधि लग गई ।कोरबा आना हुआ, तब उन्होंने अपने साथ मुझे रहने को कहा। कई तरह की चर्चाओं का दौरान लगा कि खुद वे बी.एम.डब्ल्यू. ड्राईविंग करते श्रीकृष्ण की तरह मुझे राह दिखा रहे हैं।पूज्य बाबाजी 14 दिसंबर 2014 को कोरबा पहली बार आगमन होने पर हंसते हुए उन्होंने महापौर चुनाव में कांग्रेस के आगे निकल जाने की बात कही थी,जिसे 15 दिसम्बर को अपने Timeline में मैंने पोस्ट किया। इस दौरान दूसरे दिन सुबह तक उनके साथ रहा और औघड़ पंथ को नजदीक से समझने का अवसर मिला। इंदौर सेव भंडार के संचालक रामकुमार भईया ने चर्चा के दौरान बताया कि रामजी बाबा ने पी.एच.डी.किया है। अघोरपंथ को लेकर लोगों के मन में भ्रांतियां है कि वे चीखते है, गंदे रहते है। बाबाजी से मिलकर मेरे मन का संशय तो पहली बार आश्रम में मिलने पर ही दूर हो गया था क्योंकि रामजी बाबा किसी के नाम के साथ जी लगाकर ही शांत भाव से बातें करते हैं और सबसे बड़ी बात कि आपके मन में क्या चल रहा है, ये वे जान जाते हैं और संकेतों में कई बार व्यक्त भी कर देते है। जी लगाकर सामने वाले से बात करने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अघोर विद्या किसी भी व्यक्ति को हर चीज़ के प्रति समान भाव रखने की शिक्षा देती है। अघोरी तंत्र को बुरा समझने वाले शायद यह नहीं जानते हैं कि इस विद्या में लोक कल्याण की भावना है। अघोर विद्या व्यक्ति को ऐसा बनाती है जिसमें वह अपने-पराए का भाव भूलकर हर व्यक्ति को समान रूप से चाहता है, उसके भले के लिए अपनी विद्या का प्रयोग करता है।
बाबाजी के साथ रहते हुए मैंने महसूस किया कि इनकी वाणी को ध्यान से सुनना चाहिए क्योंकि कई बार संकेतों में रामजी बाबा अद्भुत बातें बोल जाते हैं।इनके आशीर्वाद शीघ्र प्रतिफलित होते हैं। यह अगर खुश हो जाए तो आपकी किस्मतबदलने की क्षमता रखते हैं। आमतौर पर रामजी बाबा या औघड़ पंथ से जुड़े लोग किसी से खुलकर बात नहीं करते लेकिन आभार बाबाजी का जो उन्होंने मेरे मन की बात समझ ली थी और बड़े भईया विष्णुनारायण जोशी जी को उन्होंने कहा “जोशी जी आप पीछे जाइये,साहूजी मेरे साथ आगे बैठेंगे” और जब एक बार उनका सानिध्य मिला तो अनगिनत विषयों पर उनसे खुलकर चर्चा हुई और मेरे साथ वर्तमान में जो चल रहा है, इस पर भी उन्होंने सांकेतिक शब्दों में मुझे बता दिया था और अब उनकी बातें समझ आ रही हैं।आप में मगन रहने वाले औघड़ पंथ से जुड़े लोग अक्सर सामाजिक गतिविधियों से दूर रहते हैं, हिमालय की कठिन तराइयों में इनका वास होता है। ईश्वरीय कृपा होगी तभी आपको इनका सानिध्य मिलेगा अन्यथा ये बाजू से निकल जाएंगे और आपको पता भी नही चलेगा। मेरे साथ तो ऐसा हुआ कि अचानक ही कोरबा से लगभग 200 किलोमीटर दूर कुनकुरी जाना हुआ और इनके पहली बार दर्शन हुए और वो आशीर्वाद सदा के लिए मेरा सौभाग्य बन गया। कहते हैं इन्हें साक्षात शिव भी दर्शन देते हैं और जब तक इन्हें ना छेड़ा जाए किसी का अहित नहीं करते। छत्तीसगढ़ के कई उद्योगपति, राजनेता इनकी शरण लेने के लिए तरसते है,एक राजनेता का मुझे याद है, जब इनके आश्रम को छेड़ा था और परिणाम भी सामने आ गया था।
सार यह है कि अघोरी अपने वचन के बहुत पक्के होतेहैं, वे अगर किसी से कोई बात कह दें तो उसे करने की सामर्थ्य रखते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि अघोरियों की साधना में इतना बल होता है कि वे मुर्दे से भी बात कर सकते हैं, किसी भी अनहोनी को होनी में तब्दील करने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि अघोरी शिव स्वरूप माने जाते हैं । ये बातें पढ़ने-सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इन्हें किसी भी अंश में नकारा भी नहीं जा सकता, उनकी साधना को कोई चुनौती नहीं दी जा सकती।

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