वाहन दुर्घटना की दशा में क्षतिपूर्ति राशि पर बता रहें है तेजतर्रार अधिवक्ता अनीष सक्सेना (9827179722)

इंसान जैसे-जैसे विकास की ओर अग्रसर होता गया है, वैसे वैसे इंसान ने अपनी आवश्यकता पूर्ति हेतु अनेक प्रकार खोज की।तात्पर्य यह है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। इसी तारतम्य में इंसान ने यातायात के नवीनतम साधनों की खोज की, जिसमें सड़क परिवहन की अहम भूमिका है। जब सड़क परिवहन की उपयोगिता बढ़ी तब यह आवश्यकता हुई सड़क परिवहन हेतु मोटर एवं वाहन का उपयोग करने वाले लोग कुछ नियमों का पालन करें क्योंकि सभ्य समाज में अधिकतम उपयोग की जाने वाली या व्यवहार में लाई जाने वाली वस्तुओं का नियमों एवं प्रावधानों के भीतर प्रयोग हो। अतएव मोटर वाहन जो आज प्रत्येक व्यक्ति के परिवहन व आवागमन हेतु जीवन में विशेष महत्व रखते हैं, उक्त संबंध में उपयोग को नियमों एवं प्रावधानों के भीतर संयमित करने हेतु 14 अक्टूबर 1988 को भारत में मोटर वाहन अधिनियम 1988 लागू किया गया। यह बात विशेष रूप से स्पष्ट है कि सुविधा के दृष्टिकोण से उपयोग किए जाने वाली प्रत्येक वस्तु के कुछ दुष्प्रभाव भी होते हैं ठीक उसी तरह सड़क मार्ग में उपयोग किए जाने वाले परिवहन साधनों से कुछ दुर्घटनाएं भी अवश्य संभावित है। इन्हीं बढ़ती हुई दुर्घटनाओं के कारण भारत सरकार के द्वारा लंबे समय के बाद मोटर वाहन बिल 2019 को दोनों सदनों में पारित किया गया है। इस कानून का एकमात्र उद्देश्य है कि कानून के उल्लंघन के हिसाब से जुर्माना इतना अधिक हो कि लोग कानून के उल्लंघन से डरे और समाज में सुधार आए और खतरनाक व द्रुत गति से वाहन चलाने वाले, बिना हेलमेट वाले, रेड लाइट जंप करने वाले, शराब पीकर वाहन परिचालन करने, सीट बेल्ट ना बांधने वाले पहले से  कई गुना ज्यादा जुर्माना भरने  के डर से लोगों में सुधार हो लेकिन  इसके बावजूद दिन प्रतिदिन वाहन दुर्घटनाओं की दर में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे किसी की जान जाती है या अस्थाई तौर पर अपंगता या अशक्तता के शिकार हो जाते हैं। जिन व्यक्तियों पर दुर्घटनावश अपंगता आ जाती है या किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति को या उस व्यक्ति के परिवारजन या आश्रितों को भारी आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उस संबंध में मोटर वाहन अधिनियम 1988 में पीड़ित या दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति जो दुर्घटना के कारण स्थाई या अस्थाई अपंग या अशक्त हुआ हो या चोटिल हुआ हो अथवा किसी व्यक्ति के मृत्यु होने की दशा में उसके परिवार जन या आश्रितों को उक्त दुर्घटना के परिणाम स्वरुप हुए आर्थिक क्षति, मानसिक वेदना व शारीरिक पीड़ा हेतु क्षतिपूर्ति धन या क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान का प्रावधान किया गया है। पीड़ित पक्ष आश्रित या परिवारजन उक्त दुर्घटना के संबंध में क्षतिपूर्ति के भुगतान हेतु गठित मोटरयान दावा अधिकरण जो कि न्यायालय में कार्यरत माननीय जिला न्यायालय व अतिरिक्त जिला न्यायालयों को उक्त अधिकरण के शक्ति के तहत की पूर्ति हेतु प्रस्तुत प्रकरणों पर सुनवाई तथा निराकरण का अधिकार दिया गया है के समक्ष अपने क्षति पूर्ति भुगतान हेतु दावा पेश कर सकते हैं। माननीय न्यायालय मृत व्यक्ति हेतु प्रस्तुत प्रकरणों में आश्रितजनों की आश्रितता एवं मृत व्यक्ति के आय के आधार पर क्षतिपूर्ति दावा प्रकरणों में चोट की प्रकृति, इलाज का व्यय अशक्तता एवं अपंगता के अनुपात के आधार पर वाहन चालक या वाहन स्वामी अथवा वक्त दुर्घटनाग्रस्त वाहन के बीमा कंपनी के विरुद्ध क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान का आदेश कर सकती है। क्षतिपूर्ति राशि भुगतान कराए जाने का मुख्य उद्देश्य पीड़ित पक्ष को आर्थिक सहयोग प्रदान करवा कर उसे हुए मानसिक शारीरिक व आर्थिक पीड़ा से राहत दिलाना है

Leave a Reply

Your email address will not be published.