हम Information Age में रह रहे हैं… जमाना सोशल media का है, advanced technologies का है… High end Telecommunication का है… Hybrid Warfare का है.

आगे जाने से पहले Hybrid Warfare को समझना जरूरी है.

 

Information Age में लड़ाईयाँ युद्ध के मैदान के अलावा Internet पर, stock एक्सचेंज में… bio labs में….आपके Intellectuals और Institutions के द्वारा लड़ी जाती हैं….. इस लड़ाई में कोई प्रत्यक्ष हथियार नहीं होता…..narratives होते हैं, posts होते हैं, ट्वीट्स होते हैं…. Data hacking होता है… Phishing होती है…. और भी कई तौर तरीके होते हैं.

आप आम भाषा में समझिये कि यह एक Non Conventional war है… जिसमें परंपरागत हथियारो का इस्तेमाल नहीं होता… बम बारूद मिसाइल नहीं चलाये जाते….. कम से कम resources का इस्तेमाल कर अपने दुश्मन का ज्यादा से ज्यादा नुक्सान करना, उन्हें confuse करना, और उन्हें तोडना…. बस यही इस warfare का एकमात्र उद्देश्य है.

ज़ब कोई देश आर्थिक रूप से, धार्मिक रूप से, सांस्कृतिक रूप से, बौद्धिक रूप से तोड़ा जा चुका हो, तब उसे जीत पाना काफी आसान होता है….क्योंकि तब आपके दुश्मन के खेमे के लोग ही आपकी सहायता करते हैं… Inroads बनाने में.

खैर.. लौटते हैं मुद्दे पर.

ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने की ख़बर मिलती है…. हिन्दुओं के लिए वो शिवलिंग है, वहीं मुस्लिम पक्ष उसे एक फ़ौवारा बता रहा है….. अब वो जो भी है न्यायालय बता ही देगा, और उसके लिए जरूरी सबूत पहले ही जमा करा दिए गए हैं.

अब आते हैं media पर…. तो इस खबर के आने के बाद हर रोज हर चैनल पर मछली बाजार लगा करता था… दोनों पक्ष बैठते थे और उलजुलूल बातें होती थी. चूँकि यह एक धार्मिक मामला है, इस पर जरूरी संयम और संवेदनशीलता रखनी चाहिए थी…. लेकिन नहीं हुआ.

एक पक्ष ने गलत बोलना जारी रखा…तो गुस्से में दूसरे पक्ष ने भी कुछ कहा और बवाल हो गया…. होना यह चाहिए था कि news चैनल को दोनों ही पक्ष के बयान काट देने चाहिए थे… लेकिन TRP के लिए क्लिप चला दी गयी.

अब चल गयी तो चल गयी….फिर उसे तोड़ा मरोड़ा गया… गलत references लगाए गए और यह साबित करने की कोशिश की गयी कि यह तो अपराध है, शान में गुस्ताखी है.

मुझे याद है, यह मुद्दा तब उठा जब Alt News वाले भालू ने इस वीडियो को circulate करना शुरू किया….वहीं फोटोशॉप से कमर पतली करने वाली पत्रकार महोदया ने सीधा इस्लामिक दुनिया को ही एप्रोच करना शुरू कर दिया…. ऐसा बताया जाने लगा जैसे पता नहीं क्या पाप हो गया.

जो नुपुर शर्मा ने कहा, उसके reference हदीस में भी हैं, और प्रख्यात इस्लामिक preacher जाकिर नाईक ने भी उन्ही शब्दों में उसी बात को कई बार कहा है…. वीडियो हैं उन सबके…. लेकिन यहाँ बात वो थी ही नहीं…. यह एक बहाना था जिसके लिए यह लोग 8 साल से इंतज़ार कर रहे थे.. और मौका मिल ही गया.

इस बात को हुए हफ्ते से ऊपर हो गया, कोई ज्यादा हल्ला गुल्ला नहीं हुआ था…अगर बीजेपी को भय होता तो नुपुर को उसी दिन suspend कर चुकी होती…. लेकिन नहीं किया…. फिर आज क्यों किया???

3 June इस मामले में बड़ी महत्वपूर्ण date है…. इस दिन कानपुर में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी दौरे पर थे… इसी दिन नुपुर शर्मा के बयान के विरोध में बाजार बंद रखने का ऐलान किया गया. इस बात को हिन्दू पक्ष ने नहीं मना… बाद में दोनों पक्षो में पत्थरबाजी हुई… फिर पुलिस action भी हुआ…. इसमें PFI, AIMIM का हाथ मिला है, वहीं मुख्य साजिशकरता कांग्रेस का नेता है.

शाम को जब दंगाइयो को पुलिस पकड़ रही थी.. लगभग उसी समय Egypt की “International Org for the Support of the Prophet of Islam”, ने इस मुद्दे पर ट्वीट करना शुरू किया….. उन्होने लगभग 60 ट्वीट्स किये और एक ख़ास हैशटैग भी चलाया.

इन सभी ट्वीट्स में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर लगी थी, और हिजाब और अन्य मुद्दों के बारे में लिख कर यह बताया गया कि भारत में एक ख़ास वर्ग के साथ जुल्म किया जा रहा है.

ट्वीट्स ने रफ़्तार पकड़ी, और 6 june को इनकी संख्या सबसे ज्यादा थी….. वहीं पिछले 2 दिनों में ऐसे ट्वीट्स बहुतायत में आने के पीछे जो मुख्य कारण था, वो था Coordinated Efforts….लेकिन किसका??

Alt News, PTI, South Asian Index जैसे handles का… और उसमे साथ दिया IOSPI org ने.. जो मुस्लिम Brotherhood का एक media org है…. कुछ महीनो पहले इसी संगठन ने फ़्रांस की सरकार के खिलाफ Boycott का अभियान भी छेड़ा था… सऊदी से लेकर पाकिस्तान तक.. हर देश ने फ़्रांस सरकार का विरोध करने के लिए campaign चलाये.. उसके पीछे IOSPI ही था.

5 जून को अरब के कुछ बड़े ट्विटर handles, कुछ सेलिब्रिटीज ने इस मुद्दे पर post करना शुरू कर दिया…. कोई भारतीय सामान का boycott कर रहा था, कोई भारतीय कर्मचारियों को निकालने की बात कर रहा था.

यहाँ मामला देश से बाहर चला गया था…. इस्लामिक देशों का एक संगठन है OIC, ख़बर वहां भी पहुंची… उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं था कि भारत में क्या हुआ.. क्यों हुआ….. प्रोपेगंडा ऐसा चलाया गया क़ि उसमे कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी की नजदीकी नेता ने Prophet मोहम्मद के बारे में गलत कहा.

यहाँ इस फर्क को समझिये… कोई आम नेता बोले… कोई जाकिर नाईक बोले तो फर्क नहीं पड़ता…. मोदी के नजदीकी नेता ने कहा… जब यह शब्द इस्तेमाल होते हैं, तब बात कहीं ओर ही चली जाती है… ओर वही हुआ भी.

इस्लामिक देशों को इससे मतलब नहीं था कि नुपुर शर्मा किसी panelist को जवाब दे रही थी… उनके लिए तो यह शान में गुस्ताखी करने जैसा पाप था….. ओर इन सभी संगठनों ने सोशल media का इस्तेमाल कर इस बात को हर इस्लामिक देश में फैला दिया.

5 June की trending देखेंगे तो समझ आएगा कि चल क्या रहा था…. नुपुर शर्मा के बयान के मुद्दे पर मोदी कि तस्वीर लगाईं जा रही थी…. उनके खिलाफ trends हो रहे थे…. Trends दरअसल Social Media का तापमान नापने का एक thermometer है… पता लगा जाता है कि हवा का रुख क्या है.

OIC हमारे लिए क्यों जरूरी है??? हमारे लिए तेल ओर गैस वहां से आता है…. हमारे लाखो लोग वहां काम भी करते हैं… ऐसे में कोई भी ऊँचनीच होने से देश पर प्रभाव पड़ता ही है.

क्या भारत OIC से डरता है??? बिल्कुल नहीं…. भारत ने पिछले कई सालों में OIC को अपने हिसाब से tackle किया है… याद कीजिये राम मंदिर मुद्दा ओर धारा 370… दोनों पर इस्लामिक दुनिया में बवाल होना तय था… लेकिन नहीं हुआ…. नहीं करने दिया.

इस बार क्या अलग था…. पैग़म्बर के बारे में कुछ गलत बात को justify कैसे किया जाए???

अब आप कह सकते हैं कि शिवलिंग को भी बुरा भला कहा गया… तो dost वो काम हमारे ही लोगों ने किया था… कोई अरब वाला आपके चैनल पर बैठ कर शिवलिंग को फ़ौवारा नहीं बोल रहा था…. आपके लोग बोल रहे थे… उन पर कार्यवाही नहीं हुई इसके लिए आप चाहे सरकार को कोसिये, या अपने संगठन की कमी को… लेकिन इसकी वजह से इस्लामिक देश तो अपने नबी का अपमान नहीं सहेंगे ना???

5 june को ही खबरें आने लगी कि अरब देशों में भारतीय सामान का विरोध होना शुरू हो गया…. कुछ लोगों को नौकरी से निकाल दिया.. कुछ के पासपोर्ट जब्त हो गए…. हालांकि यह पूर्णतः सच है, या आधा अधूरा है… यह जानने में समय लगेगा.

जब यह समाचार सरकार तक पहुंचा तो उन्हें लगा होगा कि दोनों नेताओं को suspend करके इस मामले को ख़त्म करते हैं…. क्यूंकि बेवजह इस मुद्दे पर इतने देशों से लड़ने ओर वहां स्थति भारतीयो को खतरे में डालने का कोई फायदा नहीं. दूसरी बात अगर कोई मतभेद होता है, बवाल ओर बढ़ता है, तो इसके हमारे तेल गैस की supply पर फर्क पड़ना तय है…… हो सकता है यही सोच कर यह निर्णय लिया होगा…. वैसे option थे भी नहीं.

आप इसे झुकना कह सकते हैं…..56 इंच को 5.6 इंच कह सकते हैं…. लेकिन इस स्थति में ओर बेहतर क्या होता??? क्या भरवत सरकार कह देती कि हम इस बयान के साथ हैं…. फिर क्या होता???

इस अभियान को मुस्लिम Brotherhood ने चलाया था… तो जाहिर है उन्हें इस्लामिक देशों का समर्थन था…. तभी दोपहर होते होते क़तर, इरान, पाकिस्तान, ओर फिर OIC का भी letter भारतीय सरकार के पास आ चुका था… पाकिस्तान से कोई फर्क नहीं पड़ता… लेकिन बाकि देश हमारे सहयोगी हैं….. ओर यह सब तब हो रहा था जब उपराष्ट्रपति नायडू क़तर की यात्रा पर थे.

फिर एक ख़बर उड़ाई गयी कि क़तर ने हमारे उपराष्ट्रपति को दिए जाने वाले डिनर को रद्द कर दिया है… जो झूठ था.

Hybrid Warfare का सबसे बड़ा हथियार है Misleading Information दे कर सामने वालों को भ्रमित करना.. ओर दुश्मन के camp में फूट डालना.

जैसे ही नुपुर शर्मा ओर नवीन जिंदल के suspension की ख़बर आयी.. हिन्दुओं का गुस्सा फूट पड़ा… सरकार को कोसा जाने लगा…. कोई कह रहा है कि यह फट्टू सरकार है, आगे से वोट नहीं देंगे… ये नहीं करेंगे वो नहीं करेंगे…….. आपने कभी सोचा है इस अभियान का Objective क्या होगा???

इस सरकार को हटाना…. यही इनका objective है 16 मई 2014 के बाद…. ओर आज आप खुद यह बात करके किसका काम आसान कर रहे हैं???

उधर मुस्लिम brotherhood, ISI, ISPR, ओर IOSPI जैसे संगठन साथ खड़े हैं… हम एक Divided House बन गए हैं….. आप पाकिस्तान, अरब ओर अन्य देशों के social media trend देखिये एक बार…… आप का ही योगदान दिख रहा है वहां.

Hybrid Warfare की खूबसूरती ही यही है कि इसमें आप ही कब Misinformation का माध्यम बन जाते हैं, आपको पता नहीं लगता…. आज आप खुद वो trend चला रहे हैं, जिसके लिए ISPR ओर ISI को ढूंढ़ने पर लोग नहीं मिलते थे…. आप उन्ही का काम मुफ्त में कर रहे हैं.

रही बात नुपुर की, वो सुरक्षित हैं, पहले से ज्यादा बेहतर हैं… जल्दी ही वापसी भी करेंगी.

सवाल फिर से एक ही है…. हम कब सीखेंगे??? या हम ऐसे ही कठपुतली ही बने रहेंगे???

आप किसी भी Sensational ख़बर पर एकदम से प्रतिक्रिया देने से बचें… कुछ घंटे नहीं लिखेंगे तो आसमान नहीं गिर जाएगा….. किसी भी घटना का पूरा perspective देखना जरूरी होता है उस पर react करने से पहले…..आप एक नुपुर शर्मा की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, सरकार तो लाखों भारतीयों का सोच रही होगी जो उन देशों में हैं…. क़ल को उन्हें कुछ होता है तब भी आप सरकार को ही कोसेंगे ना???

अगर मेरी कलम या मेरी प्रतिक्रिया से दुश्मन का फायदा हो रहा है, तो मैं जानकारी मिलने तक ना लिखूंगा, ना प्रतिक्रिया ही दूंगा.

अब इस मामले में आप किसी को कोसिये, सरकार को गाली दीजिये, वोट ना करने की कसम खाइये, नोटा दबाइये, या बीजेपी के ऑफिस में फोन खड़कइये… सच यही है कि यह वाला युद्ध हम हारे हैं.

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