कौशल सिखौला : मोदी-शाह घर बैठे कौन सी कथा सुन रहे हैं…

देश में एक लॉबी है जो राम और रामसेतु की तरह चाणक्य को काल्पनिक बताती है । लेकिन बड़े अभिमान से शरद पवार को चाणक्य मानती है । देवेंद्र फडणवीस ने पहले उद्धव की भभूत झाड़ी और अब शरद पवार को धोबी पछाड़ मार कर बता दिया कि मराठी राजनीति के असली चाणक्य तो वही हैं ? शरद का बुढ़ापा और सुप्रिया का हाजमा बिगाड़कर शरद पवार को बता दिया कि त्यागपत्र का नाटक कर उसे वापस लेना और फिर परिवार धर्म का पालन करते हुए बेटी को पार्टी सौंपना कितना भारी पड़ सकता है ।

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महाराष्ट्र के घटनाक्रम का असर विपक्षी दलों के एकता प्रयासों पर पड़ सकता है । अगला लावा यदि नीतीश के बिहार में ही फूट पड़े तो आश्चर्य मत कीजिएगा । यदि फूटा तो सबसे बड़ा असर विपक्षी एकता के सूत्रधार नीतीश कुमार की जेडीयू पर पड़ेगा । हालत लालू परिवार की भी खराब है ।

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बात विपक्षी एकता की हो जरूर रही है , कांग्रेस बैठकों में जा भी रही है , लेकिन राहुल की रुचि मुहब्बत की दुकान खोलने के बाद अब मैकेनिक की दुकान में ज्यादा हो गई है । दरअसल खड़गे को अध्यक्ष भले ही बना दिया गया हो , सोनिया जानती हैं कि ममता और केजरीवाल किसी भी सूरत में राहुल को पीएम फेस नहीं बनाएंगे । जाहिर है उन्हीं के इशारे पर राहुल कईं तरह की दुकानें खोलने में मस्त हैं , एकता प्रयासों में नहीं ।

विपक्षी एकता का पिटारा यूसीसी पर खुलने वाला है । उद्धव और केजरीवाल के बाद अब मायावती ने भी कह दिया है कि उनकी पार्टी यूसीसी का समर्थन करेगी । यह पूर्ण संवैधानिक है । एनसीपी में फूट पड़ जाने के बाद अब अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी भी यूसीसी के समर्थन में आएगी । अजित के साथ प्रफुल्ल पटेल का साथ छोड़ जाना शरद पवार को ज्यादा खल रहा है ।

कमाल की बात है कि पार्टी में इतनी बड़ी बगावत हो गई और कथित चाणक्य को दोपहर बारह बजे तक भनक भी न मिली ? देखिए आप यदि विपक्ष विपक्ष खेल रहे हैं , कभी पटना और कभी बंगलुरू में बैठकें कर रहे हैं तो शाह मोदी घर बैठे कथा नहीं सुन रहे हैं ? सावधान रहिए अभी और भी कईं खेले बाकी हैं । गोटियाँ बैठाइए , सिर्फ मुहब्बत की आड़ में नफ़रत की दुकानें खोलते रहे तो साहब ! खुलने के साथ साथ जल्द शटर भी पड़ जाएंगे ?

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