सुरेंद्र किशोर : श्रेय 1 परिवार को..1942 की अगस्त क्रांति.. सिर्फ बिहार में 562 गोली, 26 को फांसी, नजरबंद 214, जेल गए 23861, सामूहिक जुर्माना 42 लाख रुपए
मैंने यह आंकड़ा उस ‘‘जनता’’ साप्ताहिक(पटना) के पुराने अंक से नोट किया था जिस पत्रिका के संपादक स्वतंत्रता सेनानी,साहित्यकार और पूर्व समाजवादी विधायक प्रातः स्मरणीय दिवंगत बेनीपुरी जी हुआ करते थे।
1942 की ‘अगस्त क्रांति’ के दौरान
सिर्फ बिहार में 562 लोग अंग्रेजों
की गोलियों के शिकार हुए,
26 को फांसी की सजा हुई,
यह आंकड़ा सिर्फ बिहार का है।
यदि पूरे देश के बलिदानियों का आंकड़ा आपके सामने हो तो
अगस्त क्रांति की व्यापकता समझ में आ जाएगी।
स्वाधीनता सेनानियों ने अंग्रेजी शासन का जीना दूभर कर दिया था।
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अविभाजित बिहार में 1942 की ‘अगस्त क्रांति’
पर एक विहंगम दृष्टि
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बलिदानियों की संख्या – 562
जिन्हें फांसी की सजा हुई – 26
जो फांसी पर लटक गए — 7
फांसी से छूट गए-19
नजरबंद — 214
जेल जाने वालों की संख्या — 23861
सजायाफ्ता – 4359
जितने थानों पर स्वतंत्रता प्रेमियों ने अधिकार किया-80
सामूहिक जुर्माना – 42 लाख रुपए
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मैंने यह आंकड़ा उस ‘‘जनता’’ साप्ताहिक(पटना) के पुराने अंक से नोट किया था जिस पत्रिका के संपादक स्वतंत्रता सेनानी,साहित्यकार और पूर्व समाजवादी विधायक प्रातः स्मरणीय दिवंगत बेनीपुरी जी हुआ करते थे।
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यह आंकड़ा तो सिर्फ बिहार का हैं, पूरेे देश में न जाने कितने लोग बलिदान हुए होंगे।
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पर,आज मुट्ठी भर चतुर-चालाक लोग स्वतंत्रता का पूरा श्रेय खुद व एक परिवार के लिए हड़प लेना चाहते हैं।
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