अगड़े पिछड़े और दलित के नाम पर राजनीति करने वाले सारे लोग बिहार के समस्तीपुर जिले के मऊ गांव के इस तस्वीर को ठीक से देख लें। यह आज की घटना और तस्वीर है। यह परिवार दलित और पिछड़ी जाति से आने वाले नही हैं, इनका कसुर सिर्फ इतना है कि ये ब्राम्हण हैं। और सरकार और न्यायलय के नजर में ये ऊंची जाति से आते हैं अतः इन्हें किसी तरह की आरक्षण और सुविधा नहीं मिलनी चाहिए। भूख व गरीबी के कारण इस पुरे पांच सदस्यीय परिवार ने आज आत्महत्या कर लिया।

बिहार की राजनैतिक पार्टियों,वामपंथियों व फ़र्ज़ी समाजवादियों के लिए यह परिवार शोषक, ज़ालिम, सामंती, मनुवादी, फॉरवर्ड व अगड़ा था।
बिहार में जातिगत जनगणना की बात हो रही है, जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सभी पार्टियों का कहना है कि जतिगत जनगणना से लोगों का विकास होगा।  विकास की योजना लोगों के लिए बनाई जाएगी। उनके लिए विकास का रास्‍ता बनाया जाएगा। उन्‍हें आरक्षण और उनके लिए आर्थिक मदद की व्‍यवस्‍था की जाएगी। इस बीच समस्‍तीपुर जिले के मउ गांव  से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। और सोचने पर मजबूर करने वाली भी कि बिहार में जाति आधारित जनगणना तो हो रही है लेकिन इसका फायदा आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को कितना फायदा होगा। जबकि बिहार में आर्थिक कमजोरी की वजह से समस्‍तीपुर के विद्यापति नगर के मऊ थाना अंतर्गत एक सवर्ण परिवार के 5 लोगों ने आर्थिक तंगी से तंग आकर खुद को फांसी पर लटका लिया।

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