प्रसिद्ध पातकी : एकादशी.. श्रीविष्णु सहस्त्रनाम के गोपनीय प्रयोग

एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम से नारायण के किसी एक नाम को लेकर लिखता हूँ। आपका खूब प्रोत्साहन मिलता है, वैसे हमारी लेखनी श्रीहरि के नामों के समक्ष नितांत बचकानी है। श्रीहरि के नामों की महिमा अपरंपार है।
आज सोचा कि भगवान के नाम के बजाय विष्णु सहस्रनाम केे पाठ पर क्यों ना लिखा जाए। लोग अलग अलग तरीके से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। वैसे तो विष्णु सहस्रनाम में 107 श्लोक हैं। किंतु फलस्तुति के पहले श्लोक..
वनमालि गदी शार्ङ्गी शंखी चक्री च नंदकी।
श्रीमान् नारायणो विष्णु: वासुदेवोअभिरक्षतु।
को मिलाकर 108श्लोक हो जाते हैं। अत: भीष्म दादा ने 108 श्लोक रूपी सुंदर माला तैयार की है। इसे आप चाहे तो निम्न तरीके से बरत सकते हैं:-


1. आपके जीवन का जो वर्ष चल रहा है, उस नंबर का विष्णु सहस्रनाम के श्लोक का उस वर्ष नित्य पाठ करिए। जैसे आप 35 वर्ष पूरे कर 36 वें वर्ष में चल रहे हैं तो पूरे वर्ष विष्णु सहस्रनाम के 36वें श्लोक का पाठ अवश्य करें।
2. आप चाहे तो ऊपर दिए गये उदाहरण के अनुसार 36 श्लोक से विष्णु सहस्रनाम का पाठ आरंभ कर उसी पर समाप्त करिए। फल स्तुति पाठ पूरा होने पर सामान्य ढंग से करिए।
3. हर मनुष्य जब जन्म लेता है तो उस समय चंद्रमा किसी नक्षत्र में होता है। प्रत्येक नक्षत्र को चार चरण में बांटा जाता है। अत: आपका जन्म नक्षत्र भी किसी नक्षत्र के किसी चरण विशेष में होता है। हम जानते हैं कि कुल 27 नक्षत्र होते हैं। प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं। 27 को चार से गुणा करने पर गुणनफल 108 आता है। आपका नक्षत्र जिस चरण में हो उसके अनुसार अपना श्लोक चुन लें। जैसे अश्वनी नक्षत्र के पहले चरण में पहला श्लोक, दूसरे में दूसरा, भरणी के पहले चरण में पाचवां। रेवती के पहले चरण में श्लोक संख्या 105. अब यह श्लोक संख्या आपके आत्मिक विकास का बीज है। इस पर खूब श्रद्धा के साथ चिंतन मनन स्मरण करिए। श्रीहरि आपको सही राह पर हाथ पकड़ कर ले जाएंगे।
4.याम संस्कृत में समय मापन की एक इकाई है। एक याम तीन घंटे का होता है। एक दिन में आठ याम होते हैं। यह प्रयोग बहुत आकस्मिक स्थिति में ही किया जाना चाहिए। हालात जब बिलकुल ही बिगड़ गये हों। भगवान विष्णु के किसी भी अवतार, शिवजी या हनुमान जी के चित्र, प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर दिन में हर तीन घंटे बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करिए। ध्यान रखिएगा यह अति गोपनीय प्रयोग है, सामान्य स्थिति मे तनिक भी यह प्रयोग ना करें।
5. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते समय शालिग्राम भगवान को 108 तुलसी दल चढ़ाया जाता है। यह संभव न हो तो 108 बादाम, किशमिश, या कुछ ना संभव हो तो इलायची थाना ही भोग लगा दीजिए। पाठ के बाद उसे मित्रों, परिजनों को वितरित कर स्वयं भी पाइये।
6. अब सबसे प्रासंगिक बात। 21 अगस्त को गुरु पुष्य योग पड़ने जा रहा है। इस दिन से शुरू कर 40 दिन तक विष्णु सहस्रनाम का पाठ करिए। एक अच्छा संयोग यह रहेगा कि इन चालीस दिन में पितृ पक्ष भी गुजरेगा। विष्णु सहस्रनाम पाठ का फल अपने पितरों को समर्पित कर दीजिएगा। निश्चित जानिए कि पितरों को प्रसन्न करने का यह बहुत उत्तम तरीका है।
एकादशी की राम राम

Veerchhattisgarh

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