वैदिक मान्यताएँ : ईश्वर व ईश्वर का स्वरूप (भाग 2)

वह परमपुरुष बिना शरीर के, बिना इन्द्रियों के ऐसे काम करता है मानो उसके असंख्य सिर हों, असंख्य आँखें हों

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