कलकत्ता हाईकोर्ट के जज विवेक चौधरी ने अपने आदेश में कहा था, ‘. आलो रानी सरकार के पास बांग्लादेश का मतदाता पहचान पत्र है. उनकी शादी बांग्लादेशी नागरिक से हुई है, जो उन्हें वहां की नागरिक साबित करने के लिए काफी है. नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार उन्होंने भारत की नागरिकता कभी हासिल नहीं की.’

पश्चिम बंगाल में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में बनगांव दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली उम्मीदवार आलो रानी सरकार ने शनिवार को दावा किया कि वह 1969 में भारत में (आलो रानी सरकार के मुताबिक उनका जन्म 22 मार्च, 1969 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के बैद्यबती में हुआ था) पैदा हुई थीं और बांग्लादेश में उनकी पुश्तैनी संपत्ति है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने आलो रानी को बांग्लादेशी नागरिक माना है.

अदालत ने बनगांव सीट पर भाजपा उम्मीदवार स्वपन मजूमदार की जीत को चुनौती देने वाली आलो रानी की याचिका खारिज करते हुए उनके बांग्लादेशी होने का फैसला सुनाया था. न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने अपने 20 मई के आदेश में कहा था, ‘आलो रानी सरकार ने पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड के आधार पर भारतीय नागरिक होने का दावा किया था, जो भारत की नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज नहीं हैं.

कार्यवाही के दौरान, कलकत्ता हाई कोर्ट ने पाया कि आलो सरकार, जो एक टीएमसी जिला अध्यक्ष भी थी, वास्तव में एक बांग्लादेशी नागरिक थी और उनका नाम बांग्लादेश में मतदाता सूची में था. अदालत ने टीएमसी नेता को कड़ी फटकार लगाई और फैसला सुनाया कि वह ‘भारत की असली नागरिक’ नहीं हैं. उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए चुनाव आयोग (ईसी) को उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

यह भी आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ता ने बांग्लादेश की नागरिकता प्राप्त करने पर संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार स्वेच्छा से भारत की नागरिकता को आत्मसमर्पण कर दिया है. इसलिए, वह 2021 के विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सक्षम नहीं थी. यह आगे तर्क दिया गया है याचिकाकर्ता बांग्लादेश में एक पंजीकृत मतदाता है और बांग्लादेश की नागरिक है.” अदालत ने खुलासा किया कि वह बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र की धारक भी है.

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